10+जीरो में घूमने की जगह, दर्शनीय स्थल, खर्चा और जाने का समय

Ziro Me Ghumne ki Jagah : ज़ीरो वैली पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य में लोअर सुबनसिरी (Lower Subansiri) ज़िले में स्थित है। जीरो राजधानी ईटानगर से लगभग 115–120 किलोमीटर दूरी पर और लगभग 1,500 मीटर समुद्र तल से ऊपर स्थित एक हिल स्टेशन है।

यहाँ का मौसम पूरे साल ठंडा और सुहावना रहता है। चारों तरफ पहाड़, घाटियाँ, पाइन के जंगल और धान के खेत हैं।

Ziro को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बाँटा गया है — Old Ziro और New Ziro। Old Ziro वैली का पारंपरिक क्षेत्र माना जाता है, जहाँ अपतानी जनजाति की असली संस्कृति, पुराने गाँव और धान के खेतों का शांत वातावरण देखने को मिलता है।

वहीं New Ziro, जिसे Hapoli भी कहा जाता है, ज़ीरो का आधुनिक और व्यावसायिक हिस्सा है जहाँ मार्केट, होटल, कैफे और ज़्यादातर सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।

अगर आप भी सर्दी या गर्मी की छुट्टियों में जीरो जाना चाहते हो तो आप बिलकुल सही जगह पर हो क्योंकि इस लेख में हम आपको जीरो कैसे जाएँ?, जीरो में कहा रुके?, जीरो में घूमने की जगह कौन -कौन सी है? (Ziro Me Ghumne ki Jagah), जीरो जाने में कितना खर्चा होता है? इत्यादि चीजों के बारे में आवश्यक जानकरी देंगे, तो कृपया आप इस लेख को पूरा पढ़ें।

जीरो में घूमने की जगह | Ziro Me Ghumne ki Jagah

जीरो घूमने से पहले

जीरो जाने से पहले आप उनके बारे में कुछ रोचक जानकरी पढ़े।

  • Ziro अपनी अपतानी (Apatani) जनजाति के लिए मशहूर है, जिनकी जीवनशैली, घर बनाने की शैली और खेतों की तकनीक बेहद अनोखी है।
  • यहाँ बिना किसी रसायन के खेती होती है।
  • हर साल सितंबर के आख़िरी हफ्ते में Ziro Music Festival का आयोजन होता है, जिसे देखने के लिए विदेश से भी लोग आते है। यह भारत का सबसे अनोखा और eco-friendly म्यूजिक फेस्टिवल है।
  • रिकॉर्ड के अनुसार Ziro में Crime Rate लगभग Zero है। इसे भारत के सबसे सुरक्षित travel destinations में गिना जाता है।

जीरो में घूमने की जगह (Ziro Tourist Places in Hindi)

सीख़े झील (Siikhe Lake)

सीख़े झील अरुणाचल प्रदेश की पहली कृत्रिम (मनुष्य द्वारा बनाई गई) झील है। मेन टाउन से लगभग 5 किलोमीटर दूर इस झील के चारों तरफ हरियाली और पाइन के पेड़ हैं।

यहाँ का प्रवेश शुल्क मात्र 20 रुपये है।

आप यहाँ पर झील के शांत पानी में पैडल बोटिंग और कायाकिंग का मज़ा ले सकते हैं। यहाँ बोटिंग का विकल्प है, मोटर बोट और पैडल बोट दोनों उपलब्ध होती हैं।

झील के किनारे आराम से चलने का रास्ता है। झील के पास बटरफ्लाई पार्क भी है।

सिद्धेश्वर नाथ मंदिर (Siddheshwarnath Temple)

सिद्धेश्वर नाथ मंदिर को करदो महादेव मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि यह शिवलिंग Kardo जंगल में पहाड़ी पर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का शिवलिंग भारत के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंगों में से एक है। 

लगभग 25 फीट ऊँचा और 22 फीट चौड़ा इस प्राकृतिक शिवलिंग का आधार 4 फीट जमीन के अंदर भी है। शिवलिंग के नीचे से हमेशा पानी बहता है।

शिवलिंग के ऊपर सुंदर “माला” (necklace) जैसी संरचना है, जो क्रिस्टल (स्फटिक) जैसा दिखती है। शिवलिंग के ऊपर वासुकी नाग (साँप) की आकृति भी बनाई गई है। इसके चारों ओर भगवान गणेश, पार्वती और नंदी की भी आकृतियाँ हैं।

Ziro के मुख्य मार्केट एरिया से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर आसानी से पहुँचा जा सकता है। यहाँ तक आप चाहें तो पैदल जा सकते हैं और आरामदायक सफ़र के लिए कैब का विकल्प भी मौजूद है।

जीरो कैसे जाएं?

जीरो अरुणाचल प्रदेश के निचले सुबनसिरी जिले में स्थित एक बेहद शांत, प्राकृतिक और खूबसूरत पहाड़ी घाटी है। यहाँ पहुँचना आसान है और आप सड़क मार्ग, रेलमार्ग या हवाई मार्ग—किसी भी विकल्प का उपयोग कर सकते हैं। अपने बजट और समय के अनुसार यात्री अपने लिए सबसे उपयुक्त साधन चुन सकते हैं।

हालाँकि, जीरो तक पहुँचने का सबसे सुविधाजनक तरीका सड़क मार्ग + हवाई मार्ग का संयोजन माना जाता है, क्योंकि घाटी तक सीधे विमान या ट्रेन नहीं पहुँचते, लेकिन पास के शहरों से सड़क कनेक्टिविटी अच्छी है।

सड़क मार्ग से जीरो कैसे पहुँचें?

जीरो अरुणाचल प्रदेश और असम के कई बड़े शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप ईटानगर, नाहरलागुन, लखीमपुर, नॉर्थ लखीमपुर और गुवाहाटी से टैक्सी, बस या निजी वाहन से जीरो पहुँच सकते हैं।

सड़कें पहाड़ी हैं लेकिन सुंदर प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर हैं, इसलिए यात्रा सुखद रहती है। जीरो ईटानगर से लगभग 110–120 किमी, नाहरलागुन से 100–110 किमी और नॉर्थ लखीमपुर से लगभग 115–130 किमी की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग से जीरो कैसे पहुँचें?

जीरो का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन नाहरलगुन रेलवे स्टेशन और नॉर्थ लखीमपुर हैं। है, जो अरुणाचल प्रदेश की राजधानी के पास स्थित है। यहाँ तक दिल्ली, गुवाहाटी और असम के कई शहरों से ट्रेनें उपलब्ध रहती हैं।

स्टेशन से आगे Ziro जाने के लिए टैक्सी, सूमो या बस आसानी से मिल जाती है। जीरो नाहरलगुन रेलवे स्टेशन से लगभग 100–110 किमी और नॉर्थ लखीमपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 115–130 किमी दूरी पर स्थित है।

हवाई मार्ग से जीरो कैसे पहुँचे?

Ziro Valley का निकटतम हवाई अड्डा लीलाबाड़ी हवाई अड्डा(असम) और डोनी पोलो हवाई अड्डा (ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश) है। इन एयरपोर्ट से देश के कई बड़े शहरों—दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई—के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।

एयरपोर्ट से Ziro तक टैक्सी और निजी गाड़ी आसानी से उपलब्ध रहती हैं। Ziro Lilabari Airport से लगभग 110–120 किमी और Itanagar Airport से लगभग 120–130 किमी दूरी पर और Guwahati Airport से 440–450 किमी दूरी पर स्थित है।

निष्कर्ष

जीरो की हवा में ऐसी ख़ामोशी बसती है जो दिल के भीतर के शोर को भी चुप कर देती है। यहाँ के हरे धान के खेत और चीड़ के जंगल धीरे से याद दिलाते हैं कि जीवन की असली ख़ूबसूरती सादगी में ही छुपी होती है।

इस आर्टिकल में हमने आपको जीरो में घूमने की जगहों (Ziro Me Ghumne Ki Jagah), इसके इतिहास, धार्मिक स्थलों, और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारियों के बारे में विस्तार से बताया है। हमें उम्मीद है कि यह लेख आपकी जीरो यात्रा को और भी आसान, रोचक और यादगार बनाएगा।

अगर आपके पास इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सुझाव या अनुभव है, तो कृपया हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं — हम आपकी राय के आधार पर इसे जल्द अपडेट करेंगे।

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